मध्य पूर्व में जारी विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद एक बार फिर दुनिया के लिए 'शांति का केंद्र' बन गई है। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की कूटनीतिक वार्ता के लिए पर्दे के पीछे तैयारियां चरम पर हैं। हालांकि, तेहरान ने आधिकारिक तौर पर नए दौर की बातचीत से इनकार किया है, लेकिन इस्लामाबाद के रेड जोन की अभेद्य किलेबंदी और नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी सैन्य विमानों की सक्रियता किसी बड़े मिशन की ओर इशारा कर रही है।
सीजफायर पर 'काउंटडाउन' और ट्रंप की धमकी
28 फरवरी से जारी इस जंग में पिछले दो हफ्तों से लागू अस्थायी संघर्षविराम (Ceasefire) की अवधि मंगलवार, 21 अप्रैल को खत्म हो रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यह "अंतिम और उचित डील" है। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर ईरान शर्तों पर सहमत नहीं हुआ, तो अमेरिका उसके पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाने में "कोई नरमी नहीं" बरतेगा। ट्रंप के इस रुख के बावजूद, उनके दूत जेडी वेंस और जारेड कुशनर के सोमवार रात तक इस्लामाबाद पहुंचने की खबरें हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: विवाद की असली जड़
शांति वार्ता में सबसे बड़ा रोड़ा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बना हुआ है। ईरान ने पहले इसे खोलने का वादा किया था, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी न हटाने के विरोध में तेहरान ने फिर से रास्ता बंद कर दिया है। चीन ने भी वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने के लिए होर्मुज को तुरंत खोलने का दबाव बनाया है।
मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका
इस संकट में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरे हैं। हाल ही में उनकी तेहरान यात्रा के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए 'बैक चैनल' कूटनीति सक्रिय है। यदि यह वार्ता सफल रहती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद इस्लामाबाद आकर ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के संकेत दिए हैं। पूरी दुनिया की नजरें अब अगले 24 घंटों पर टिकी हैं—क्या 21 अप्रैल को बंदूकें शांत रहेंगी या फिर एक और भीषण प्रलय शुरू होगी?