तमिलनाडु की सियासत में आज 4 मई 2026 को वह 'राजनीतिक सुनामी' आई जिसने पांच दशकों से चले आ रहे डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के द्विध्रुवीय वर्चस्व को जड़ से उखाड़ दिया है। चुनाव आयोग के ताजा रुझानों के अनुसार, सुपरस्टार जोसेफ विजय की पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) 234 सीटों में से 106 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभरी है। यह करिश्मा ठीक वैसा ही है जैसा 1972 में एमजीआर ने अपनी नई पार्टी बनाकर किया था।
मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की करारी शिकस्त
इस चुनाव का सबसे बड़ा उलटफेर कोलाथुर सीट पर देखने को मिला, जहाँ मुख्यमंत्री एम के स्टालिन को टीवीके (TVK) उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने ऐतिहासिक अंतर से हरा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उदयनिधि स्टालिन के 'सनातन विरोधी' बयानों और सत्ता विरोधी लहर ने डीएमके को तीसरे स्थान पर धकेल दिया है। एआईएडीएमके (AIADMK) फिलहाल 42 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर बनी हुई है, जबकि डीएमके (DMK) महज 38 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
विजय का 'MGR 2.0' अवतार और युवाओं का साथ
विजय ने अपनी रील-लाइफ लोकप्रियता को एक ठोस चुनावी जनादेश में बदल दिया है। उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन और लोकलुभावन कल्याणकारी योजनाओं (6 फ्री सिलेंडर और बेरोजगारों को भत्ता) के वादे से युवाओं और महिलाओं का दिल जीत लिया। राज्य में इस बार रिकॉर्ड 85.1% मतदान हुआ, जिसमें पहली बार वोट देने वाले युवाओं ने पारंपरिक द्रविड़ राजनीति के बजाय विजय के 'तीसरे विकल्प' को चुना।
गठबंधन का गणित और चुनौती
भले ही टीवीके (TVK) 100 का आंकड़ा पार कर चुकी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 के जादुई आंकड़े से वह अभी भी कुछ कदम दूर है। इस बीच, कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने के संकेत दिए हैं, जबकि विजय ने अपने उम्मीदवारों को 'हॉर्स ट्रेडिंग' से बचाने के लिए रिजॉर्ट में शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल, तमिलनाडु एक नए युग की दहलीज पर खड़ा है जहाँ 'थलापति' अब राज्य के नए सिरमौर बनने की राह पर हैं।